बॉलीवुड की फिल्मों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरने वाले कादर खान कभी मस्जिद पर भीख मांग कर गुजारा करते थे

उन्होंने 1973 में आई "दाग" से एक्टिंग कॅरियर की शुरुआत की थी।
कादर खान ने कई फिल्मों में काम किया। वे रियल राइटर, एक्सलेंट एक्टर के साथ-साथ ग्रेट पर्सन भी थे। अपने काम को लेकर बहुत सीरियस और सिंसेयर रहते थे। किसी भी सेट पर कोई भी सीन हो, मामूली से मामूली सीन में भी चार चांद लगा देते थे। उन्होंने हंसते-खेलते काम किया। परन्तु उनका जीवन बचपन से ही बहुत संघर्षमय रहा।
कादर से पहले उनके परिवार में 3 बेटे हुए थे पर सभी का आठ साल की उम्र तक निधन हो जाता था। कादर के जन्म के बाद उनकी मां डर गईं कि कहीं उनके साथ भी ऐसा ही न हो। तब उन्होंने भारत आने का फैसला किया और वो मुंबई के धारावी में आकर बस गए। कादर जब एक साल के थे तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इसके बाद वे डोंगरी जाकर एक मस्जिद पर भीख मांगते थे। दिन-भर में जो दो रुपए मिलते उससे उनके घर में चूल्हा जलता था। इतनी सी उम्र में ही वे पहली बार काम पर जाने वाले थे तब मां ने उन्हें रोककर कहा कि यह तीन-चार पैसे कमाने से कुछ नहीं होगा। अभी तू सिर्फ पढ़ बाकी मुसीबतें मैं झेल लूंगी। कादर खान को बचपन से ही लोगों की नकल करने की आदत थी। जब मां नमाज के लिए भेजती थी तब वे बंक मारकर कब्रिस्तान में जाकर दो कब्रों के बीच बैठ खुद से बातें करते हुए फिल्मी डायालॅग्स बोलते थे। 
एक दिन कादर पढ़ा रहे थे तब उनके स्कूल में दिलीप कुमार का फोन आया। उन्होंने इच्छा जताई कि वे उनका ड्रामा देखना चाहते हैं। कादर ने उनके सामने दो कंडीशन रखीं। एक तो वे ड्रामा शुरू होने से बीस मिनट पहले आएंगे और दूसरा उन्हें यह प्ले पूरा देखना होगा। यही प्ले देखकर दिलीप ने कादर को दो फिल्मों में साइन किया।
बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी का जलवा बिखेरने वाले कादर खान ने 300 से अधिक फिल्मों में काम करने के साथ ही कादर खान ने 250 से ज्यादा फिल्मों में डायलॉग्स भी लिखे। साल 2019 में पद्मश्री पाने वाले कादर 9 बार फिल्मफेयर में नॉमिनेट हो चुके हैं।

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